नये बिहार के प्रहरी का रवैया कुछ बदला बदला सा नजर आया २५ तारीख को . बिहार सैन्य पुलिस प्रसिक्षण केंद्र जब डुमराव में बन रहा था तो यहाँ के निवासी तहे दिल से इसका स्वागत किये थे और खुसिया मनाये थे की "चलो अब हमारी सुरक्छा करने वाल यहः पैदा होगा, और वह से सिख कर निकलेगा तो डुमराव की ही नहीं पुरे बिहार की सुरक्छा अपने कंधो पर ले लेगा " पर २५ जनवरी को तो दुमराववासियो को कुछ उल्टा ही नजर आया. छठिया पोखरा पर जब लडकियों के छेड़खानी का विरोध यहाँ के निवासियों ने किया तो बिहार सैन्य पुलिस के जवान अपने साथियो के साथ मिलकर घरो में घुसकर महिलाओ औ बचो को लाठी डंडे से पिटा . है तो यह छोटी खबर लेकिन शर्मिंदगी से भरा हुआ. कल के होने वाले बिहार के ये नए प्रहरी क्या बिहार की बदलती हुई छवि में धब्बा तो नहीं लगायेंगे? यह सवल उठता है ? वैसे ही बिहार की छवि अभी उतनी सुधरी नहीं है जितनी होनी चाहिए. एक जमाना था जब बिहार और बिहारी के नाम पर लोग नाक भौ सिकोड़ते थे. पर इधर कुछ सुधरी सुधरी नजर आने लगी थी . अगर फिर से इस तरह के समाचार आने लगे तो लोग यही बोलेंगे की बिहार कभी सुधरेगा नहीं. इसलिए हम सबको मिलजुल कर ऐसी घटनाओ को रोकना होगा. दोषी को कड़ी से कड़ी सजा देनी होगी . ताकि भविष्य में कोई इस तरह की घटना को अंजाम देने के पहले एक पल के लिए सोचे . आप बोलिएगा की बिहार में अच्छे अच्छे विकास के कार्य हो रहे है, आपने इसी समाचार को क्यों चुना? भाई मै भी एक बिहारी हु और मै एक भुक्तभोगी हु जब मुझे लोग देखकर किराये अपना मकान नहीं देते थे. गन्दी गन्दी गालिया देते थे फबतिया कसते थे मुझ पर विश्वास ही नहीं करते थे की भाई बिहार में अच्छे लोग भी रहते है. अच्छे ख़राब तो हर जगह होते है. कोई मेरी बात को सुनने को तैयार नहीं होता था . इस हाल में मै क्या करता . जीवका तो चलाना है अपने बिहार का यही दुर्भाग्य है की कोई कल कारखाना नहीं है अगर है भी तो मरी हुई. इस हाल में मुझे झूठ का सहारा लेना पड़ता था और अपने आपको मध्य प्रदेश का रहने वाला बतलाना पड़ता था तब जाकर लोग मुझपर विस्वास करते थे मुझे किराये पर मकान मिलता था. अब आप ही बताइए की उस समय मेरा दिल कितना दुखता होगा. मेरे जैसे हजारो बिहारी पुरे देश में फैले हुए है और इसके भुक्तभोगी है. जाहिर सी बात है मेरे जैसा कोई भी प्रवासी बिहारी नहीं चाहेगा की दुसरे बिहारी भी इसके भुक्तभोगी बने.
Wednesday, January 26
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