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Wednesday, February 16

LLICHCHAD KAUN ?

मेरे घर पर स्कुल के एक शिक्छक आते है मेरे बेटे को पढ़ाने . वे केवल मैथ और सैंस पढ़ाते है . हफ्ते में चार दिन . इसके एवज में वे एक हजार रुपये लेते है. इसके आलावे वे महिना में तिन चार दिन गायब भी हो जाते है. तिन चार महीने इसी तरह चलता रहा. मेरी मेम साहब ये सब देख रही थी . वे रोज मुझे इसके बारे में टोकती थी . जैसा की हमेशा होता है मै उनकी बात सुनकर छुपी साध लेता हु. पर मेरी मेम साब को ये सब नागवार गुजरा. अब जब भी सिक्छाक महोदय छुटी मारते मेरी मेम साब दुसरे ही दिन मोबाइल लेकर तैयार रहती . फोने कर के पूछती " सर जी कब आ रहे है? बेचारे सर जी को आने का मन भी नहीं रहता तो भी मन मारकर भी आना पड़ता. ऐसे ही एक दिन सर जी छुट्टी मारे , दुसरे दिन फोन करने  पर वे आये और नहीं आने का कारण मेरे बेटे लो बता रहे थे जिसे मेरी मेम साहब घर के अंदर से सुन रही थी. जब मै ड्यूटी से गहर गया तो बताने लगी की कल सर क्यों नहीं आये. हुआ यो की सर जी किसी बच्चे को पढ़ा कर अपने  बाइक से बिना हल्मेत पहने घर की और जा रहे थे. रास्ते में पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया बिना हेक्मेत के बाइक चलने के जुर्म में , बात फयिन्न देने की होने लगी. पुलिसवाला दो सौ रुपये मांग रहा था पर सर जी सीधा जबाब दिए की उनके पास एक भी पैसा नहीं है. पुलिसवाला गुस्सा कर बोला अच्छा सौ रुपये दे दो . सर जी फिर वोही जबाब दिए. हारकर पुलिसवाला पूछा कहा जा रहे हो ? सर जी जबाब दिए - दवा खरीदने .
तो दवा का पैसा दे दो - पुलिसवाला बोला
सर जी बोले- दवा उधार लेने जा रहा हु
बड़ा  लिच्चाडी आदमी है, अच्छा पान खाने के लिए पैसे दे दो.
सर जी बड़ी मासूमियत से बोले- पान खिलानेवाला जजमान मै भी धुध रहा हु.
अंत में पुलिसवाला हार कर बोला- जा भाग तुझ से बड़ा LICHCHAD आज तक नहीं देखा
सर जी अपना बाइक उठाये और आराम से चलते बने.
इस कहानी को सुना सुना कर मेरी मेम साहब हस्ते हसते लोट पोत हो गयी थी
आपको कैसा लगा.

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