सौ दिन चले अढाई कोस
आप मानिये या न मानिये ये सच है की आजके युग में जब हम इन्टरनेट के माध्यम से त्रान्जक्सन करते है उस युग में हमर पोस्ट ऑफिस बैल गाडी युग में काम कर रहा है . जबकि आज की युग की सारी सुविधाए उसे मुहैया करायी जा चुकी है . बात यह है की मेरे जान पहचान का एक चाय वाला अपने बेटे के इलाज के लिए ३५०० रुपये बोकारो स्टील सिटी के हेड पोस्ट ऑफिस से मोनी आर्डर बर्कत्ता के लिए 17.01.11को भेजा जो हजारीबाग हेड ऑफिस होकर जाता है.पता नहीं उस चाय वाले बेचारे का नसीब ख़राब था की पोस्ट ऑफिस में आदमी नही है या हज़रिबघheadPOST ऑफिस को वे सारी सुविधाए नहीं मिली है जिसके कारण मोनेओर्देर आज 22.02.11तक नहीं मिला है . वो बेचारा चाय वाला रोज कभी हज़रिबघ हेड पोस्ट ऑफिस फोने करता है तो कभी बर्कत्ता पोस्ट ऑफिस को . दसो बार तो वह बोकारो स्टील सिटी हेड पोस्ट ऑफिस के चक्कर लगा चुका हैअगर पोस्ट ऑफिस DEPTT से कोई इस ब्लॉग को पढेगा तो प्लेअसे उस वेचारे को हेल्प कीजिये .
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